Saturday, September 11, 2010

शादी का पहला ही साल था

अभी शादी का पहला ही साल था,ख़ुशी के मारे बुरा हाल था!खुशियाँ कुछ यूँ उमड़ रही थीं,की संभाले नहीं संभल रही थी!!सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आना,थोडा शर्माते हुए हम नींद से जगाना,वो प्यार भरा हाथ हमारे बालों में फिराना,मुस्कुराते हुए कहना की डार्लिंग चाय तो पी लो,जल्दी से रेडी हो जाओ आपको ऑफिस भी जाना है!!
घरवाली भगवान् का रूप लेकर आयी थी,दिल और दिमाग दोनों पर छाई थीसांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,एक पल भी जीना दूर दुस्वार होता था!!
५ साल बाद………..
सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आनाटेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को श्कूल छोड़ते हुए जाना……………
एक बार फिर वोही आवाज आयी,क्या बात है अभी तक छोड़ी नहीं चारपाई,अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना!!मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना!!
न जाने घरवाली कैसा रूप लेकर आयी थी,दिल और दिमाग पर काली घटा चाई थी!!साँस भी लेते तो उन्ही का ख्याल होता,हर समय जेहान में एक ही सवाल होता!!क्या कभी वो दिन लौटकर आएगा,क्या हम एक बार फिर कुवारे बन पाएंगे!