Saturday, September 11, 2010

देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं,

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की। देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..
येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..
नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..
कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..
सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..
माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये “अभी”पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..
ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में.

बातें करके रुला ना दीजिएगा

बातें करके रुला ना दीजिएगा…यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा…
ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही…पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा…
खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया…दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया…
पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम…जिसने दोस्ती को दिल से निभाया…
अब और मंज़िल पाने की हसरत नही…किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही…
आप जैसे दोस्त जबसे मिले…किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही ***!

शादी का पहला ही साल था

अभी शादी का पहला ही साल था,ख़ुशी के मारे बुरा हाल था!खुशियाँ कुछ यूँ उमड़ रही थीं,की संभाले नहीं संभल रही थी!!सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आना,थोडा शर्माते हुए हम नींद से जगाना,वो प्यार भरा हाथ हमारे बालों में फिराना,मुस्कुराते हुए कहना की डार्लिंग चाय तो पी लो,जल्दी से रेडी हो जाओ आपको ऑफिस भी जाना है!!
घरवाली भगवान् का रूप लेकर आयी थी,दिल और दिमाग दोनों पर छाई थीसांस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,एक पल भी जीना दूर दुस्वार होता था!!
५ साल बाद………..
सुबह सुबह मेडम का चाय लेकर आनाटेबल पर रख कर जोर से चिल्लाना,आज ऑफिस जाओ तो मुन्ना को श्कूल छोड़ते हुए जाना……………
एक बार फिर वोही आवाज आयी,क्या बात है अभी तक छोड़ी नहीं चारपाई,अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना!!मुन्ना की टीचर्स को फिर खुद ही संभाल लेना!!
न जाने घरवाली कैसा रूप लेकर आयी थी,दिल और दिमाग पर काली घटा चाई थी!!साँस भी लेते तो उन्ही का ख्याल होता,हर समय जेहान में एक ही सवाल होता!!क्या कभी वो दिन लौटकर आएगा,क्या हम एक बार फिर कुवारे बन पाएंगे!